शनिवार, 23 अक्टूबर 2021
लोकतंत्र और विपक्ष
बुधवार, 20 अक्टूबर 2021
Pandit Ram Khelawan : The Great Social Activist
[Blogger : Asharfi Lal Mishra ]
नाम : राम खेलावन मिश्र
जन्म : मार्च 25, 1909 ,इंजुवारामपुर कानपुर।[1]
मृत्यु : सितम्बर 02,1982 ,इंजुवारामपुर कानपुर।
राष्ट्रीयता : भारतीय
व्यवसाय: शिक्षक ,सामाजिक कार्यकर्ता
प्रसिद्धि कारण: प्रधान ,सामाजिक कार्यकर्ता
जीवनसाथी : रेणुका देवी
बच्चे : तीन पुत्र
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| Ram Khelawan Mishra |
राम खेलावन मिश्र
(जन्म मार्च 25.1909 --मृत्यु सितम्बर ०2,1982) जन्म से क्रन्तिकारी विचारों के थे। इनका जन्म ब्रिटिश साम्राज्य भारत के यूनाइटेड प्रोविंस (उत्तर प्रदेश ) के कानपुर जिले के ग्राम इंजुवारामपुर (इन्जुआरामपुर) में मार्च २५ ,१९०९ को हुआ। [1]a
जीवन परिचय
इनके पिता नाम नन्हा था। वर्ष 1926 में इन्होने मिडिल स्कूल डेरापुर , कानपुर वर्तमान में डेरापुर, कानपुर देहात से वर्नाक्यूलर फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष १९२७ में रेणुका देवी से विवाह हुआ। इसी वर्ष प्राइमरी स्कूलमें शिक्षक बने।
क्रांतिकारी
चूँकि यह बचपन से ही क्रांतिकारी विचारों के थे इसलिए शिक्षण कार्य में मन नहीं लगा और शिक्षण कार्य से त्याग पत्र देकर भारत में चल रही आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। वर्ष १९४२ में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध इनका जन जागरण अभियान बहुत उग्र था। गांव के समीप से जाने वाली उत्तरी रेलवे के किनारे टेलीफोन लाइन का लगभग २०० मीटर तार काट कर भूमिगत हो गए। इसी बीच जुरिया के शिवराम पाण्डेय ,बड़ागांव भिक्खी के शम्भू दयाल चतुर्वेदी और बहिरी उमरी के शिशुपाल सिंह और कठारा के जंग बहादुर सिंह आजादी के इस अभियान में कूद कर ब्रिटिश सरकार को ललकारा और रेलवे की संचार व्यवस्था ठप्प कर दी।[2]
समाज सेवा
1-गांव के तालाबों में जल भराव के लिए ग्रामीणों के सहयोग से तालाबों को गहरा कराया जिससे पशुओं के पीने एवं स्नान के लिए पानी की समस्या का निराकरण हुआ।
2- गांव में छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए प्राथमिक पाठशाला खुलवाई गई।
3-भारत के स्वतंत्र होने पर ग्रामवासियों ने उन्हें सर्व सम्मति से प्रधान चुन लिया।[3] दूसरी बार भी ग्रामवासियों ने प्रधान बनाना चाहा परन्तु इन्होने अस्वीकार कर दिया।
4-गांव में अपने ही चबूतरे पर प्राथमिक पाठशाला का संचालन शुरू करवाया। इस चबूतरे को पंचायती चबूतरा कहा जाता था।
स्वतन्त्रता दिवस पर सर्व प्रथम इसी चबूतरे पर तिरंगा फहराया गया था। बाद में इसी चबूतरे पर स्वतन्त्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के समारोह आयोजित किये जाने लगे।
मृत्यु
जनता की सेवा करते हुए २ सितम्बर १९८२ को उनका देहांत हो गया।
सोमवार, 13 सितंबर 2021
राजनीति का अधोगामी मुद्दा
ॐ
लेखक : अशर्फी लाल मिश्र
| अशर्फी लाल मिश्र |
स्वतंत्रता पूर्व राजनीति के मुद्दे दूसरे थे और स्वतंत्रता के बाद दूसरे हो गए। स्वतंत्रता के पूर्व और स्वतंत्रता के बाद लगभग दो दशक तक राजनीति में समाज सेवा का मूल्य सर्वोपरि था।
लगभग सातवें दशक (1960 -1970) के उत्तरार्ध तक राजनीति के मूल्यों में बदलाव आना प्रारम्भ हो गया। अब सत्ता प्राप्ति के हथकंडे प्रारम्भ हो गए। धीरे धीरे दशक 1990 -2000 में कुछ घटिया राजनीतिक हथकंडे अपनाये भी गए। इन घटिया राजनीति के मुद्दों ने सत्ता के द्वार तो खोल दिए लेकिन राष्ट्र को जो क्षति हुई उसकी पूर्ति आज तक संभव न हो सकी ।
आइये अब हम उस घटिया राजनीतिक मुद्दा " शिक्षा में नकल को प्रोत्साहन " पर चर्चा करेंगे:
शिक्षा में नकल को प्रोत्साहन
नकल करना मानव प्रवृत्ति है। अच्छी नकल से अच्छे परिणाम और खराब नकल से खराब परिणाम। करोड़पति व्यक्ति भी यदि किसी दुर्व्यसन की नकल करता है तो खाकपति हो जाता है। सामान्य व्यक्ति यदि लगनशील है तो वह भी उच्च आदर्श को सामने रखकर उच्च श्रेणी का वैज्ञानिक/ प्रोफेसर बन सकता है।
बच्चो में बूढ़ों की अपेक्षा नकल की प्रवृत्ति अधिक देखी जाती है। 1965 के बाद धीरे धीरे छात्रों में नकल की प्रवृत्ति का संचार होने लगा। कुछ शिक्षक भी नकल कराने में अपनी गरिमा समझने लगे।
आइये आज हम उत्तर प्रदेश राज्य में छात्रों में बढ़ती नकल की प्रवृत्ति पर चर्चा करेंगे :
जब उत्तर प्रदेश में सहायता प्राप्त के साथ साथ मान्यता प्राप्त विद्यालयों का प्रचलन बढ़ा। इसी बीच विद्यालय के प्रबंध तंत्रों में छात्रों को अपने-अपने विद्यालय प्रवेश के लिए आकर्षित करने के लिए नकल का सहारा लेना प्रारम्भ हुआ। परिणाम यह हुआ कि मेधावी छात्र मेरिट में पीछे होने लगे और नकलची छात्र बोर्ड और विश्वविद्यालयों में अपना स्थान बनाने में सफल होने लगे। शिक्षा में हो रही इस धांधली रोकने के लिए वर्ष 1992 में तत्कालीन मुख्य मंत्री कल्याण सिंह ने नकल अध्यादेश लागू कर दिया।परिणाम यह हुआ कि उस वर्ष यू पी बोर्ड और राज्य विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणाम बहुत ही निराशा जनक रहे। नकल रुक गई थी और नकल द्वारा अपना अस्तित्व कायम रखने वाले विद्यालयों में निराशा पैदा हो गई थी।
छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा माफियाओं में छाये असंतोष के मनोविज्ञान को अध्यापक से राजनीति में आने वाले राजनेता मुलायम सिंह यादव दौड़ कर दोनों हाथों से लपक लिया। बस अब फिर क्या था चूँकि मुलायम सिंह यादव पहले शिक्षक रहे थे वह छात्रों में नकल की प्रवृत्ति और अभिभावकों की में अच्छे अंक पाने की प्रवृत्ति से भली भांति परिचित थे।
नकल अध्यादेश लगने से जहां मुख्य मंत्री कल्याण सिंह अपनी सफलता पर इठला रहे थे वहीं दूसरी ओर सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने नकल अध्यादेश निरस्त करने की घोषणा कर दी। अब केवल अगले चुनाव की देरी थी। जब अगला चुनाव आया तो सपा के घोषणा पत्र (manifesto) में नकल अध्यादेश निरस्त करने का भी उल्लेख किया किया गया तथा मुलायम सिंह यादव ने अपनी चुनाव रैलियों में नकल अध्यादेश निरस्त करने एवं स्वकेंद्र करने का जनता को आश्वासन दिया। नकल अध्यादेश निरस्त करने और स्व केंद्र करने के वायदे को शिक्षा माफिया ,छात्रों एवं अभिभावकों ने जोरदार स्वागत किया। बस फिर क्या था छात्र ,अभिभावक और शिक्षा माफिया गद -गद हो गए। इस प्रकार मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश में सत्ता हथियाने में कामयाब रहे।
नकल अध्यादेश निरस्त होने के परिणाम
नकल अध्यादेश निरस्त करने और स्वकेंद्र करने से उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई।
उसके बाद से विद्यालयों,महाविद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति नगण्य हो गई। शिक्षक भी अनियमित हो गए।अब शिक्षण संस्थाएं केवल प्रवेश और परीक्षा केंद्र के रूप में परिवर्तित हो गए।
उसके बाद जितनी भी सरकारें आईं शिक्षा को पटरी पर लाने में सफल नहीं हो सकीं। मुलायम सिंह यादव के इस राजनीतिक मुद्दे को काटने का अब तक किसी में साहस नहीं हुआ।
आज स्थिति यह है छात्र उन शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश चाहते हैं जहां नकल की या परीक्षा परिणाम की गारंटी हो। आज प्राथमिक विद्यालयों में नाम लिखाने के बाद अभिभावक अपने बच्चों को निजी मान्यता रहित या मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ाना चाहते है।
मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक मुद्दे " नक़ल अध्यादेश समाप्त करने एवं स्वकेंद्र स्थापित करने " से भले ही सत्ता हथिया ली हो लेकिन उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने का श्रेय भी मुलायम सिंह यादव को ही दिया जायेगा। आज तक उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पंगु है जिसे पटरी पर लाना टेढ़ी खीर है।
--अशर्फी लाल मिश्र ,शिक्षाविद ,कवि एवं लेखक ।
शुक्रवार, 9 जुलाई 2021
इक दिन ऐसा आयेगा , पानी पेट्रोल बन जायेगा।
द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र
| अशर्फी लाल मिश्र |
इक दिन ऐसा आयेगा,
पानी पेट्रोल बन जायेगा।
यों तो कहने में ज़रा अटपटा लग रहा है कि भविष्य में पेट्रोल -डीजल की भांति भूमि जल पर भी सरकार का पूर्ण या आंशिक नियंत्रण हो जाने की पूर्ण संभावना है लेकिन जो वर्तमान में परिस्थितियां बन रही हैं या दिखाई दे रही हैं उनसे साफ साफ़ परिलक्षित होता है कि भविष्य में भूजल पर भी किसी न किसी रूप में सरकारी नियंत्रण अवश्य होगा। अब आगे हम उन परिस्थितियों पर दृष्टिपात करेंगे :
1 -वर्षा कम होना
2 -जल संचयन के लिए तालाबों का गहरा न होना।
3- बहुत से तालाब अतिक्रमण के कारण अपने छोटे आकर में।
4- बहुत से तालाब खेतों में परिवर्तित हो गये।
3 - भूमि जल के रिचार्ज न होने से भूमि जल के स्तर का गिरना।
4 - भूमि जल - रिचार्ज की तुलना में जल दोहन का अधिक होना।
5- वर्षा ऋतु में खेतों में जायद की फसलें होना।
उक्त बिंदुओं पर यदि हम गहराई से विचार करें तो पाते हैं कि भविष्य में भूमि जल ,जो आज आम उपभोक्ता के लिए सर्व सुलभ है उसमें शायद परिवर्तन की स्थिति आ सकती है। भविष्य में ऐसी भी स्थिति आ सकती है कि अन्य खनिजों की भांति भूमि जल पर सरकार का स्वामित्व हो जाये।
सुझाव
1- भूमि जल का दुरूपयोग न करें।
2 -खेतों में मेड़ों को ऊंचा कर वर्षा का जल रोकें।
3 - सभी तालाब अतिक्रमण मुक्त हों।
4 -चूँकि अब सभी जगह पक्के मकानों का प्रचलन है इस लिए गावों में भी तालाब गहरे नहीं हो रहे हैं इसलिए तालाबों से मिटटी खोदने के लिए पूर्ण स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
5 - गावों या कस्बों में जल प्रवाह बावड़ी , तालाबों की ओर हो जिससे पहले बावड़ी और तालाब जल से भर सकें।
गुरुवार, 13 मई 2021
कोरोना की दूसरी लहर में अवसर की तलाश
द्वारा: अशर्फी लाल मिश्र
updated on 03 /06 /2021
कोरोना की दूसरी लहर के बीच ही बाबा रामदेव ने अपना व्यापार चमकाने की दृस्टि से एलोपैथी एवं उसकी चिकित्सा पद्धति एवं चिकित्सकों की कटु आलोचना की। बाबा राम देव आयुर्वेद की प्रशंसा तो कर सकते थे लेकिन एलोपैथी चिकित्सा पद्धति एवं विज्ञान की आलोचना करते से बचना चाहिए था। जब सम्पूर्ण राष्ट्र कोरोना महामारी की चपेट में था और कोरोना योद्धा डॉक्टर एवं अन्य सहयोगी जान की बाजी लगाकर कोरोना का सामना कर रहे थे तब बाबा रामदेव ने एलोपैथी और उनके डॉक्टरों का उपहास किया जो उचित नहीं कहा जा सकता।
13/05/21
आज सम्पूर्ण राष्ट्र जब कोविड 19 के संकट के दौर से गुजर रहा है। तब राष्ट्र विरोधी, समाज विरोधी, विपक्ष एवं काला बाजारी करने वाले अपने अवसर की तलाश में जुटे हुए हैं।
प्राकृतिक आपदा या अन्य आपात स्थिति में सम्पूर्ण राष्ट्र को एक जुट होकर उसका सामना करना चाहिए।लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।
कोरोना की पहली लहर में सम्पूर्ण देश में केंद्र द्वारा एक साथ लॉक डाउन लगा था तब परिणाम अच्छे रहे और सम्पूर्ण विश्व में भारत की सराहना हुई थी।उस समय विपक्ष ने चाहा था कि लॉक डाउन राज्यों पर छोड़ दिया जाना चाहिए क्योंकि राज्यों में बेरोजगारी बढ़ रही है।
आज जब लॉक डाउन लगाना राज्यों पर छोड़ दिया गया।तब देश की स्थिति बदतर हो गई और विश्व में भारत की बदनामी भी हो रही है।
आखिर ऐसा क्यों है? क्योंकि विपक्ष हर स्थिति में अवसर की तलाश में रहता है।
सोशल वर्कर /राजनेता
राजनेता अपने को समाज सेवक (Social worker) कहते है और सोशल वर्कर के रूप में भारत रत्न जैसे पुरस्कार पाने की भी इच्छा भी करते है।
आज कोरोना महामारी अवसर पर कितने ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने देश की इस संकट की घड़ी में लोगों की सहायता के लिए हाथ बढ़ाये हैं।
कितने राजनेता/सोशल वर्कर हैं जिन्होंने अस्पताल खोले हों, बेड उपलब्ध कराए हैं या मरीजों के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध करायी। अधिकांश राजनेता जनता का मूड बदलने के लिए बयानबाजी करते हैं।
एक कम बुद्धि के राजनेता ने कहा कि वैक्सीन भाजपा की है ।इससे लोगों में भ्रम पैदा हुआ और लोगों ने वैक्सीन से दूरी बना ली।परिणाम स्वरूप कोरोना की दूसरी लहर का जनता में विनाशकारी रूप देखने को मिला। सभी लोग भलीभांति जानते हैं कि वैक्सीन वैज्ञानिक बनाते हैं।
एक राजनेता , जो एक राजनीतिक पार्टी के महामंत्री भी हैं अवसर की तलाश में जनता को गुमराह करने के लिए कहते हैं कि हमारी पार्टी के एक नेता को सरकार ने कोरोना पॉजिटिव कर दिया।यह कितना हास्यास्पद बयान है।
बयानबाजी करने वाले राजनेता अच्छी तरह जानते हैं कि कोरोना महामारी आक्रमण करने में भेदभाव नहीं करती।
काला बाजारी
जब से कोरोना की दूसरी लहर आई तब से काला बाजारी चरम पर है।जीवन रक्षक दवाएं अंकित मूल्य से कई गुना अधिक मूल्य पर बिक रही हैं ।प्राइवेट अस्पतालों में इलाज भी कई गई गुना मंहगा हो गया है। फार्मेसी और प्राइवेट अस्पताल अवसर का भरपूर फायदा उठा रहे हैं।
फल विक्रेता, परचून की दुकान वाले या अन्य दुकानदार भी अवसर का भरपूर फायदा उठा रहे हैँ।
मंगलवार, 11 मई 2021
आतिशबाजी और जनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध हो
द्वारा: अशर्फी लाल मिश्र
| अशर्फी लाल मिश्र |
आज सम्पूर्ण विश्व में कोरोना महामारी (कोविड 19) से हाहाकार मचा हुआ है। कोविड 19 से आज संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत सर्वाधिक प्रभावित देश है।
आज हमें जो भी कोविड19 से प्रभावित आंकड़े प्राप्त हो रहे हैं वे चाहे पॉजिटिव हों या ठीक हुए हों या फिर मृत्यु के आंकड़े हों सभी सरकारी अभिलेखों के आंकड़े हैं। इससे इतर जाने कितनी कोरोना से मौतें हो रही हैं उनका उल्लेख कहीं नहीं मिलता।
जाने कितने लोग माइल्ड कोरोना से प्रभावित हैं जो स्वयं ही अपने घर में आइसोलेट हो गए और उनमे बहुत लोग ठीक भी हुए और कुछ काल कवलित हो गए।
ऑक्सीजन स्तर
भारत में लगभग सभी जगह पेड़ पौधे एवं हरियाली है।वायुमण्डल में ऑक्सीजन कमी नहीं है लेकिन पराली जलाने, आतिशबाजी ,जनरेटर का स्तेमाल, पुराने वाहन (ट्रक, बस,लोडर,ट्रेक्टर, दुपहिया वाहन ,जुगाड़ गाड़ी जो मोटर साईकल से चलती है,आदि।) से ऑक्सीजन की कमी और कॉर्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है।
आज कोरोना महामारी के समय वायु मण्डल में ऑक्सीजन की कमी से न केवल महा नगरों में बल्कि देहात में भी लोग प्राण त्याग रहे हैं।
देश के शीर्षस्थ न्यायालय ने भी ऑक्सीजन की कमी पर चिंता जाहिर की है।
आज तुरन्त सहायता पहुंचने के लिए अस्पतालों में देश विदेश से ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति हो रही है।
लेकिन दूसरी तरफ सार्वजनिक समारोह विवाह आदि के अवसर पर आतिशबाजी और डीजल जनरेटर का धड़ल्ले से स्तेमाल हो रहा है। क्या इससे वायुमंडल का ऑक्सीजन स्तर बढ़ रहा है?
सरकार अभी तक अस्पतालों तक ही मुश्किल से ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने में व्यस्त है।
तत्काल उपाय
सरकार को चाहिए कि वायु मण्डल में ऑक्सीजन के स्तर को स्थिर करने के लिए तत्काल प्रभाव से आतिशबाजी, जनरेटरों का प्रयोग एवं पुराने वाहनों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
यदि ऐसा नहीं हुआ तो आगे चलकर हर व्यक्ति को अपने गले में सिलिंडर डाल कर चलना होगा।
अभिमत
1-आतिशबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
2-डीज़ल जनरेटर पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
3-पुराने वाहनों (चार पहिया,तीन पहिया,दो पहिया एवं जुगाड़ गाड़ी आदि) पर प्रतिबंध लगाया जाए।(इलेक्ट्रिक वाहन छोड़कर)
गुरुवार, 8 अप्रैल 2021
गुणवत्ता गिर रही है, कीमतें बढ़ रही हैं
| अशर्फी लाल मिश्र |
| Harpic |
अनर्गल बयानबाजी से कांग्रेस की प्रतिष्ठा गिरी
ब्लॉगर : अशर्फी लाल मिश्र अशर्फी लाल मिश्र कहावत है कि हर ऊँचाई के बाद ढलान होती है । ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने में कांग्रेस ने जनता ...
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द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र ©,अकबरपुर,कानपुर। अशर्फी लाल मिश्र कान्यकुब्ज ब्राह्मण -कात्यायन गोत्रीय मिश्र (बैजेगांव ) की एक शृंखला ======...
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लेखक : अशर्फी लाल मिश्र Asharfi Lal Mishra छछूंदर की यह विशेषता है कि यदि सांप उसे निगल ले तो या तो वह अन्धा हो जाता है या फिर मर ...
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द्वारा : अशर्फी लाल मिश्र Asharfi Lal Mishra Updated on 01/08/2024 सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC/ST वर्ग में कोटे के अंतर्गत कोटा स्वीकृत हुआ...







