मंगलवार, 25 जुलाई 2017

सरल मृदुभाषी राष्ट्रपति : रामनाथ कोविंद

 By:Asharfi Lal Mishra

  
Asharfi Lal Mishra










                                                                     
                                          (राष्ट्रपति के पद पर  कार्य करते हुए  रामनाथ कोविंद )
  
 (भारत के  उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर  रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति की शपथ दिलाते हुए )
रामनाथ कोविंद  (जन्म: १ अक्टूबर १९४५) भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो २० जुलाई २०१७ को भारत के १४वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। २५ जुलाई २०१७ को उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर ने भारत के राष्ट्रपति के पद की शपथ दिलायी। वे राज्यसभा सदस्य तथा बिहार राज्य के राज्यपाल  रह चुके हैं ८ अगस्त २०१५ को बिहार के राज्यपाल के पद पर उनकी नियुक्ति हुई। उन्होनें संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा भी तीसरे प्रयास में ही पास कर ली थी।
  
जन्म 
१ अक्टूबर १९४५ 
जन्म स्थान 
ग्राम -परौंख ,तहसील -डेरापुर ,जिला -कानपुर  (वर्तमान में कानपुर देहात जिला
जाति 
कोरी (कोली )उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अन्तर्गत। 
पिता का नाम 
मैकू कोविंद 
माता का नाम 
फूलवती कोविंद 
बचपन में घर में पुकारने का नाम 
लल्ला 
पत्नी 
सविता कोविंद (विवाह :३० मई १९७४ )
बच्चे 

  • पुत्र :प्रशांत कुमार (विवाहित )
  • पुत्री :स्वाती 

शिक्षा 
*प्राथमिक शिक्षा  :  प्राइमरी स्कूल परौंख , तहसील डेरापुर , कानपुर (वर्तमान में  डेरापुर, कानपुर देहात )
*पूर्व माध्यमिक शिक्षा :पूर्व माध्यमिक विद्यालय खानपुर ,तहसील डेरापुर , जिला -कानपुर 
*माध्यमिक शिक्षा :बी  एन एस डी इण्टर कॉलेज कानपुर से हाई स्कूल और इण्टरमीडिएट  परीक्षा संस्थागत छात्र के रूप में उत्तीर्ण की (यू पी बोर्ड इलाहाबाद )
*उच्च शिक्षा :वाणिज्य स्नातक और विधि स्नातक की उपाधियाँ डी ए वी कॉलेज कानपुर में शिक्षा ग्रहण करते हुए कानपुर विश्वविद्यालय ,कानपुर से प्राप्त कीं। 

वकालत 

  • १९७१ में दिल्ली की बार कॉउंसिल में वकील के तौर पर शुरुआत की। 
  • १९७७ से १९७९ तक दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे। 
  • १९७८ में सुप्रीम कोर्ट के वकील बने। 
  • १९८० से १९९३ तक सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की स्टैंडिंग कॉउंसिल में रहे। 
राजनीति में 

  • १९७७-७८ तक मोरारजी देसाई सरकार में वह उनके निजी सचिव रहे। 
  • १९९१ में भाजपा में शामिल हुए। 
  • १९९४ में पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्य सभा सदस्य मनोनीत किया। 
  • २००० में भाजपा ने पुनः उत्तर प्रदेश से राज्य सभा का सदस्य मनोनीत किया। 
  • २००७ में भोगनीपुर से चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं सके। 
प्रमुख संसदीय समितियों के सदस्य
  • अनुसूचित जाति /जनजाति मंत्रालय के कल्याण की संसदीय समिति 
  • आंतरिक मामलों के मंत्रालय की संसदीय समिति 
  • पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संसदीय समिति 
  • सामाजिक न्याय व सशक्तीकरण मंत्रालय की समिति 
  • कानून व न्याय मंत्रालय की संसदीय समिति  

आसीन पद 

  • राज्यसभा सदन समिति के चेयरमैन ,भाजपा प्रवक्ता 
  • १९९८ से २००२ तक भाजपा दलित मोर्चा और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष 
  • लखनऊ स्थित बी आर अम्बेडकर विश्ववद्यालय की प्रबन्ध समिति के सदस्य 
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर  सदस्य रहे। 
प्रमुख उपलब्धियाँ 
  • २००२ में संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधितव किया और संयुक्त राष्ट्र सभा को सम्बोधित किया। 
  • राज्यसभा सदस्य के रूप में शैक्षिक यात्रा के लिए थाईलैंड ,नेपाल,पाकिस्तान,सिंगापुर,जर्मनी,स्विट्जरलैंड,फ़्रांस,ब्रिटैन और अमेरिका का दौरा  किया।
updated on 24/06/2021
कानपुर आगमन 
राष्ट्रपति बनने के बाद प्रथम बार कानपुर आगमन हो रहा है। १५ वर्षों बाद  स्पेशल प्रेसिडेंशियल ट्रैन चलेगी। उसी से ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद २५ जून ,२०२१ को कानपुर आगमन हो रहा है। २७ जून २०२१  को  अपने पैतृक निवास परौंख जायेंगे।[1]


बुधवार, 5 अप्रैल 2017

द्विजदेव (कवि )

By : Asharfi Lal Mishra

Asharfi Lal Mishra










द्विजदेव   (१८३० -१८७१ ):रीति कालीन स्वच्छन्द  मुक्तक काव्य परम्परा के अंतिम कवि  अयोध्या  के महाराज मान सिंह माने जाते हैं जो द्विजदेव के नाम से कविता करते थे। ये जाति ब्राह्मण थे। वर्ष १८५७  की  गदर में अंग्रेजों का साथ दिया था और जागीर प्राप्त की थी लेकिन अंत समय में सब कुछ त्याग कर वृन्दावन  चले गए।
साहित्य सृजन : इन्होंने प्रणय भावनाओं की अभिव्यक्ति सहज स्वाभाविक रूप से की है। निम्न पंक्तियाँ द्रष्टव्य हैं :
तू जो  कही ,सखि ! लोनो सरूप ,सो मो अँखियान कों लोनी गई लगि। 
+                  +                                +                                +
एहो ब्रजराज ! मेरो प्रेमधन लूटिबे को , बीरा खाय आये कितै आप के अनोखे नैन !
+                                 +                          +                                         +
हाय इन  कुंजन तें  पलटि पधारे श्याम ,देखन न पाई वह  मूरति सुधामई। 
आवन समै में दुखदाइनि भई  री लाज ,चलन समै में चल पवन ने दगा दई । । 
ऋतु -वर्णन :
ऋतू -वर्णन के क्षेत्र में  इन्होंने मुक्तक काव्य परम्परा के अन्य कवियों  की अपेक्षा अधिक उची दिखाई है। इसकी सार्थकता निम्नांकित उद्धरणों में देखि जा सकती है :
मिलि माधवी आदिक फूल के व्याज विनोद -लवा बरसायो करै।
रवि नाच लता गन तान वितान सबै विधि चित्त चुरायो करै। 
द्विजदेव जु  देखि  अनोखी प्रभा अलि -चारन कीरति गया करै। 
चिरजीवो ,बसन्त  ! सदा द्विजदेव प्रसूनन की झरि लायो करै।।
घहरि घहरि घन सघन चहूँधा घेरि , छहरि छहरि विष -बूँद बरसावै ना। 
द्विजदेव की सौं अब चूकै मत दाँव ,ए रे पातकी पपीहा !तू पिया की धुनि गावै ना।

*                           +                                    +                                         +
हौं तौ बिन प्रान ,प्रान चाहत तजोई  अब ,कत नभ चंद तू अकास चढ़ि धावै ना।
   द्विजदेव को स्वच्छन्द मुक्तक काव्य परम्परा का अंतिम कवि माना  जाता है।
प्रकाशित ग्रन्थ :
(१) श्रृंगार -बत्तीसी
(२) श्रृंगार -लतिका

मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

विधि वेत्ता : भीमराव रामजी आंबेडकर


Asharfi Lal Mishra











भीमराव रामजी आंबेडकर ;भारत में एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसे कोई भी राजनीतिक दल उपेक्षित करने का साहस नहीं कर सकता। आज प्रत्येक राजनीतिक दल के लिए  आंबेडकर  प्रासंगिक हो गए हैं।  आंबेडकर बाबा साहेब के नाम से लोकप्रिय , भारतीय विधिवेत्ता ,अर्थशास्त्री ,राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक थे। 


व्यक्तिगत जीवन :
इनका जन्म १४ अप्रैल १८९१ को   मध्य प्रदेश राज्य के महू नगर के  छावनी क्षेत्र में हुआ।  इनके पिता  का नाम रामजी मालोजी सकपाल और माता का नाम भीमाबाई था। यह अपने १४ भाई बहनों में सबसे छोटे थे और पिता सेना में सूबेदार।[1]
 इनका सम्बन्ध   ग्राम अम्बावाड़े, जिला रत्नागिरी ,महाराष्ट्र से था। आंबेडकर का जन्म निर्धन दलित (महार) जाति में हुआ। महार जाति की  गणना अछूत जातियों में थी। आंबेडकर के पूर्वज ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी एवं   ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा करते थे। इनके पिता ने  सेवा करते हुए सेना में सूबेदार का पद प्राप्त कर लिया था। ६ दिसंबर १९५६ को दिल्ली में इस चमत्कारी दलित नेता का  देहावसान हो गया।  

 प्रारंभिक शिक्षा 
रामजी सकपाल ने स्कूल में अपने बेटे भीमराव का उपनाम ‘सकपाल' के स्थान पर अम्बावड़ेकर  लिखवाया, क्योंकि  कोकण प्रांत में लोग अपना उपनाम गांव के नाम से लगा देते थे। कालांतर में आंबेडकर से स्नेह  रखने वाले इनके  शिक्षक महादेव आंबेडकर ने  भीमराव  के आगे  अम्बावड़ेकर के स्थान पर आंबेडकर लिख दिया। रामजी सकपाल  वर्ष १८९४ में सेना की सेवा से सेवा निवृत्त हुए और २ वर्ष पश्चात् यह परिवार सहित सतारा आ गए। यहां आये कुछ समय पश्चात् ही  आंबेडकर की माता का निधन हो गया। आगे  परिवार की देखभाल इनकी बुआ  द्वारा की गई। अपने परिवार में केवल यही प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सके।
माध्यमिक शिक्षा :
१८९७  में अम्बेडकर का परिवार बंबई चला गया , जहां अंबेडकर एलफिन्स्टन हाई स्कूल में सर्व प्रथम नामांकित अस्पृश्य छात्र थे। १९०६ में १५ वर्ष की आयु में ९ वर्ष की रमाबाई से इनका विवाह हो गया।
१९०७ में मेट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की।
च्च शिक्षा :
*१९१२:  अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र में  बम्बई विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि प्राप्त की।
*१९१५ : अर्थशास्त्र में में परास्नातक उपाधि कोलंबिया विश्वविद्यालय ,न्यूयार्क ,संयुक्त राज्य अमेरिका। 
*१९१६: लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में नामांकन। 
*१९२१ :अर्थशास्त्र में परास्नातक उपाधि लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स ,यू के। 
*१९२७ : अर्थशास्त्र में पी एच डी उपाधि  कोलंबिया विश्वविद्यालय ,न्यूयार्क ,संयुक्त राज्य अमेरिका। 
*१९२३ : कानून में उपाधि एवं अर्थशास्त्र में   डी एस-सी  उपाधि, लन्दन विश्वविद्यालय।

 राजनीतिक जीवन :
*१५ अगस्त १९४७ को भारत के स्वतंत्र होने  पर प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अपने मंत्रिमंडल में  कानून मंत्री नियुक्त किया।
*२९  अगस्त १९४७ को  स्वतंत्र भारत के संविधान निर्माण के लिए बनी प्रारूप  समिति  के यह अध्यक्ष नियुक्त किये गए।

सम्मान :
*१९९० : भारत रत्न 

विचार  धारा :
*सामाजिक समता मूलक सिद्धांत के पोषक।
*छुआछूत के विरुद्ध लोगों में चेतना के पक्षधर।
*संविधान  के अनुच्छेद ३७० के यह विरुद्ध ।
*सबके लिए समान  कानून के समर्थक ।
;

बुधवार, 29 मार्च 2017

नोटबंदी 2016 : एक साहसिक कदम


Asharfi Lal Mishra
                                                                                                                   
            Narendra Modi 

८ नवम्बर २०१६ को रात्रि ८  बजे भारत के प्रधान मंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपने दूर दर्शन के प्रसारण में ५०० रुपये और 1000 रुपये के नोटों का रात्रि १२ बजे के बाद  से  प्रचलन बन्द करने  की सूचना राष्ट्र को  दी गयी। इस तथ्य का पूर्वानुमान मीडिया को भी नहीं था।  नरेंद्र मोदी का यह कदम केवल साहसिक ही नहीं था वल्कि जोखिम  भरा भी था।

 विमुद्रीकरण की आवश्यकता 

(१) आतंरिक काले धन को बाहर निकलना.
(२) समांतर प्रचलित मुद्रा को रोकना।
(३) आतंकवाद और नक्सलवाद पर नियंत्रण पाना।
(४) महगाई पर नियंत्रण पाना।
(५) अचल संपत्ति पर हो रही ऊँची कीमतों पर नियंत्रण पाना।
(६)भूमाफियाओं पर नियंत्रण पाना
(७) चुनाव में काले धन पर लगाम लगाना।

  विमुद्रीकरण  के लाभ 

(१)आतंरिक काले धन के बैंकों में  पंहुचने पर लोगों की क्रय क्षमता कम हो गयी और अचानक मंहगाई पर नियंत्रण लग गया।
(२)भूखंडो ,फ्लैटों आदि अचल संपत्ति के दाम अचानक ३०% तक  कम हो गये
(3)नक्सली और आतंकी घटनाओं में कमी आयी।
(4) नोटबंदी  के फल स्वरुप  2.24 लाख फर्जी कम्पनियाँ बंद [4 ]
 आम जनता पर प्रभाव 

(१) काले धन वालों ने प्रथम बार गरीब लोगों से काले धन को सफ़ेद करने में मदद मांगी।
(२) बड़े -बड़े राज नेता भी इस   निर्णय   से   भयभीत  हो गए
(३)  इस साहसिक कदम  का  आम जनता में गये सन्देश  को विपक्ष   समझ नहीं  सका।
(४) इस विमुद्रीकरण की सम्पूर्ण विश्व में प्रशंसा हुई.
(५)इससे भारत में निवेश करने वाले   वैदेशिक उद्योगपतियों में भारत के प्रति विश्वास जाग्रत हुआ।
(६) जी -२० के देशों ने भी इस निर्णय की प्रशंसा की।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर प्रशंसा                                           

                                                                      रिचर्ड थेलर
भारत में हुई नोटबंदी की प्रशंसा  वर्ष २०१७ में अर्थशास्त्र का नोबल प्राइज पाने वाले रिचर्ड थेलर  ने की थी। [1]
अमेरिकी अर्थशास्त्री  रिचर्ड थेलर  ने अपने ट्वीट में कहा था कि  "यही वह नीति है जिसका मैंने लंबे समय से समर्थन किया है। कैशलेस की तरफ यह पहला कदम है और भ्रष्टाचार कम करने के लिए अच्छी शुरुआत।" [2]  अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड  ने भारत में हुई नोटबंदी  की प्रशंसा की [2] [3]

शुक्रवार, 24 मार्च 2017

सन्यासी से मुख्यमंत्री : योगी आदित्यनाथ

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र 
अशर्फी लाल मिश्र 



योगी  आदित्यनाथ
योग का अर्थ है जोड़ और योगी का  अर्थ है  योग  करने वाला या जुड़ने वाला या फिर जोड़ने वाला। आज उत्तर प्रदेश (भारत) को एक ऐसा योगी मिल गया  जो जन -जन की समस्याओं से अपने को  जोड़ता हुआ और उन समस्याओं को हल  करने  के लिए कृत संकल्प है।

 किसी समय राजा जनता के बीच स्वयं या अपने  गुप्तचरों के माध्यम से अपनी सरकार  या राजकाज का मूल्यांकन करते थे । आज   पहली बार सौभाग्य से उत्तर प्रदेश को  पहला ऐसा मुख्यमंत्री मिला है .कि मुख्यमंत्री स्वयं अपनी सरकार की कार्य प्रणाली को परखने के लिए थाने तक पहुँचने में कोई हिचक नहीं है।
सचिवालय के निरीक्षण में मिली गंदगी से योगी के मन में यह भाव उठा कि जब सत्ता का केंद्र का  ही इतना अस्वच्छ वातावरण है तो प्रदेश के अन्य कार्यालयों का हाल कैसा होगा। आज योगी के मात्र एक मौखिक सुझाव   से ही जिलाधिकारियों तक  ने  अपने कार्यालय को स्वच्छ करने के  निमित्त हाथ में झाड़ू उठा ली।
आखिर इसका क्या कारण है ? कारण स्पस्ट है कि योगी आदित्यनाथ एक योगी हैं जो किसी राग द्वेष से रहित होकर सबका साथ ,सबका विकास के उद्देश्य को लेकर मुख्य मंत्री के पद  की शपथ ली है और  अपने उद्देध्य की पूर्ति में संलग्न है .
व्यक्तिगत जीवन ;
नाम ; अजय मोहन  विष्ट [1]
पिता का नाम :आनंद सिंह  विष्ट[2]
माता का नाम ;सावित्री देवी
जन्म तिथि : ५ जून १९७२
जन्म स्थान : पंचूर ,(तहसील -यमकेश्वर ), पौड़ी गढ़वाल ,उत्तर प्रदेश {वर्तमान में उत्तराखंड )
जाति ; राजपूत
वैवाहिक स्थिति :विरक्त  ब्रह्मचारी
शिक्षा : बी एस -सी (गणित ), हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय 
धर्म ;हिन्दू 
वैराग्य : २२ वर्ष की आयु में सन्यास ग्रहण। महंत अवैद्यनाथ के शिष्य। १२ सितम्बर २०१४ को गोरखनाथ मंदिर के महन्त अवैद्यनाथ के निधन के पश्चात मंदिर के महंत नियुक्त। १४ सितम्बर २०१४ को इन्हें  नाथ पंथ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार गोरक्षपीठ  का गोरक्षपीठाधीश्वर   बनाया गया।

मंगलवार, 21 मार्च 2017

भई गति सांप छछूंदर केरी

लेखक : अशर्फी लाल मिश्र 


Asharfi Lal Mishra







 


छछूंदर की यह विशेषता है कि यदि सांप उसे निगल ले तो या तो वह अन्धा हो जाता है या फिर  मर जाता है.  दांतों की विशेष बनावट के कारण सांप , छछूंदर को बाहर उगल नहीं सकता एवं प्राण हानि के भय से वह उसे निगलना भी नहीं चाहता ऐसी परिस्थिति में फंसे साँप की गति के समान परिस्थितियों में फंसे व्यक्ति की तुलना  की  जाती है. रामचरित मानस  में कौशिल्या की ऐसी ही मनोदशा  द्रष्टव्य है :

धरम सनेह उभय मति घेरी। भइ गति साँप छछूंदर केरी।
राखउ सुतहिं करउं अनुरोधू। धरम जाइ अरु बन्धु विरोघू।।~~ तुलसी

  रासो परंपरा में छछूंदर रायसा  एक हास्य व्यंग आधारित   अत्यंत छोटी  कृति  है। इसमें लिखा है कि एक बार छछूंदर  कुंवे में  गिर पड़ी उसे कौन निकाले। किसकी भुजाओं में सामर्थ्य है :

गिरी छछूंदर कूप में भयौ चहूं दिसि सोर।
जो बाहर काड़ै कुआ को है भुजबल जोर।।

अनर्गल बयानबाजी से कांग्रेस की प्रतिष्ठा गिरी

 ब्लॉगर : अशर्फी लाल मिश्र अशर्फी लाल मिश्र कहावत है कि हर ऊँचाई के बाद ढलान  होती है । ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने में कांग्रेस ने जनता ...