रविवार, 3 मई 2020

जनसुनवाई समाधान पोर्टल उत्तर प्रदेश : फर्जी निस्तारण

ब्लॉगर: अशर्फी लाल मिश्र




Asharfi Lal Mishra 













Updated on 16/04/2024
आज तक DPRO Kanpur Dehat के स्तर न ही नाली खोली गई और न ही समस्या हल हेतु कोई कदम उठाया गया।












Updated on 30/03/2024
मोबाइल द्वारा 23/03/2024 को DM कानपुर देहात से समस्या हल हेतु संपर्क किया गया। DM महोदय ने समस्या को DPRO कानपुर देहात को अवगत कराया। DPRO ने मोबाइल द्वारा समस्या पूँछी। लेकिन आज तक न ही गुलाम रजा (ग्राम भटौली, रूरा, ब्लॉक अकबरपुर ) के मकान के सामने न ही नाली खोली गई और न ही उसे गहरा किया गया। पंचायत विभाग द्वारा समस्या उपेक्षित की जा रही है।













Updated on  07/03/2024
जिलाधिकारी कानपुर देहात को प्रार्थना पत्र दिया गया जो निम्न है :













Updated on 04/03/2024
ADO पंचायत अकबरपुर, कानपुर देहात राजनीति से प्रेरित हैं जो ग्राम प्रधान के अनुसार कार्य करते हैं। आज से 43 वर्ष पहले घर का दूषित पानी निकलने के लिये नाली बनी थी उस समय न ही भटौली - सराय रोड था और नहीं उत्तर एवं पश्चिम में कोई मकान। नाली मात्र 9" गहरी मेरे द्वारा सार्वजनिक हित में बनवाई गई। आज नाली बन्द है और ADO पंचायत अकबरपुर ने उसे 2 फुट गहरा लिख दिया.।


















Updated on 15/12/2023
तहसील दिवस में केवल कागजी कार्यवाही हुई समस्या का निदान नहीं हुआ। मूल समस्या को छोड़कर समस्या की दिशा ही मोड़ दी गई।














Updated on 02/12/23
आज तहसील दिवस में पीठासीन अधिकारी ADM J कानपुर देहात को समस्या समाधान हेतु निम्न प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया 
02/12/2023 को तहसील दिवस अकबरपुर में दिया प्रार्थना पत्र 




















ADM J ने दिनाँक 05/12/2023 को दोपहर 12 बजे नाली का अतिक्रमण हटाने हेतु थाना रूरा को निर्देश दिये एवं ADO पंचायत अकबरपुर को मानक के अनुसार गहरा कर नाली निर्माण हेतु निर्देशित किया।
Updated on 18/11/2023
CDO कानपुर देहात की अनुपस्थित में --->
तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र में तहसीलदार महोदय ने समस्या जाँच हेतु नायब तहसीलदार अकबरपुर एवं ADO पंचायत अकबरपुर की संयुक्त टीम बनाई थीं लेकिन प्रार्थना पत्र में समस्या हल करने में ग्राम प्रधान, सचिव, ADO पंचायत एवं BDO अकबरपुर की उदासीनता का उल्लेख था अतः CDO कानपुर देहात ने पुनः जांच ADO पंचायत को दे दी।
भ्रष्टाचार को दबाने का एक सुनियोजित प्रयास।
ADO पंचायत द्वारा जांच रिपोर्ट 












ADO पंचायत (हरी ओम सक्सेना ) अकबरपुर ने असत्य रिपोर्ट देकर सामाजिक विद्वेष फैलाने का प्रयास किया है। 

Updated on 15/11/2023
पुनः BDO Akbarpur को समस्या निस्तारण हेतु CDO कानपुर देहात ने निर्देशित किया।

Updated on 04/11/2023
आज दिनाँक 04/11/2023 को संपूर्ण समाधान दिवस तहसील अकबरपुर, कानपुर देहात में समस्या समाधान हेतु प्रार्थना पत्र क्रमांक 030084523001845 दिया गया।












जॉच हेतु नायब तहसीलदार एवं ADO पंचायत की संयुक्त टीम बनाईं गई।
Updated on 31/10/2023
आज तक समस्या पेंडिंग है। 
Updated on 08/09/2023
आज 12.29 बजे मोबाइल द्वारा D M Kanpur dehat से सम्पर्क किया और उनके निर्देश पर email द्वारा समस्या को भेजा गया।
Upadated on 18/07/2023
आज तक समस्या हल हेतु किसी की ओर से सकारात्मक प्रयास नहीं हुआ। समस्या: नाली मरम्मत -->भटौली - सराय रोड पर होनी है। जगह PWD की है।कोई विवाद नहीं।
Updated on 11/04/2023
BDO Akbarpur ने अवगत कराया कि ग्राम प्रधान ने नाली निर्माण कराने से मना कर दिया। अब हमारे द्वारा मौका मुआयना किया जायेगा।
DM Kanpur से mobile द्वारा संपर्क किया तो सहयोगी ने अवगत कराया कि CHC डेरापुर के निरीक्षण में हैं।

Updated on 08/04/23
दिनांक 07/04/23 को CDD  Kanpur D. से mobile पर संपर्क किया । लेकिन CDO ने रिवर्स काल कह कर काल काट दी। उसके बाद कोई बात नहीं हुई।

Updated on 07/04/2023

BDO Akbarpur ने 27/03/2023 ko आश्वासन दिया था कि अप्रैल 23 के प्रथम सप्ताह में समस्या का समाधान हो जायेगा।आज अप्रैल 23 का प्रथम सप्ताह समाप्त हो रहा है लेकिन समस्या समाधान का कोई संकेत नहीं।
Updated ओं 04/03/2023
समस्या हल करने हेतु CDO Kanpur Dehat से mobile पर संपर्क नहीं हो सका. (10:59 पर )
11:00 बजे DM कानपुर देहात से समस्या हल हेतु संपर्क करने का प्रयास किया तो सहायक से बात हुई ।

Updated on 25/03/2023

आज BDO Akbarpur ने अवगत कि समस्या कार्य योजना में नहीं है।जब कि जनसुनवाई पोर्टल पर समस्या को कार्य योजना में सम्मिलित कर हल करना दिखाया गया है ।
Updated on 20/02/2023
आज समस्या सम्बन्धी ब्लॉग को CDO Kanpur Dehat एवं DM कानपुर Dehat को ईमेल द्वारा भेजा गया ।


Updated on 
आज ट्विटर द्वारा जिलाधिकारी कानपुर देहात को पुनः समस्या प्रस्तुत की गई ।

Updated on 05/01/2023
आज समस्या हल हेतु बीडीओ अकबरपुर कानपुर देहात से सम्पर्क किया और उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से समस्या निदान हेतु भेजी साथ ही डीएम कानपुर देहात को भी व्हाट्सएप के माध्यम से रिमांड कराया।

Updated on 26/12/2022
आज समस्या हल हेतु जिलाधिकारी कानपुर देहात को व्हाट्सएप नम्बर 7068185751 पर भेजी गई।
Updated on 16/12/2022
आज समस्या हल हेतु 11.13 बजे डीपीआरओ कानपुर देहात से मोबाइल पर निवेदन किया गया।

Updated on 29/11/2022

उक्त समस्या के हल हेतु एक प्रार्थना पत्र 23/10/2022 को ADO पंचायत , अकबरपुर, कानपुर देहात हो दिया गया जो निम्नवत है -

प्रार्थना पत्र (13/10/2022)


उक्त प्रार्थना पत्र पर भी विभाग मौन है।

Updated on 01/06/2022
पुरानी समस्या को पुनः 21/05/22 को जनसुनवाई पोर्टल पर क्रमांक 40016322005701 पर पंजीकृत की गई । समस्या आज तक पेंडिंग है। दीपक के नीचे अंधेरा ही अंधेरा सदैव रहता है।

Updated on
26 अप्रैल 2022 को व्हाट्सअप के माध्यम से ग्राम पंचायत अधिकारी आशिका सिंह, DPRO Kanpur Dehat, CDO Kanpur Dehat, DM Kanpur dehat समस्या को रिमाइंड कराया  गया।

Updated on 06/04/2022
आज ग्राम प्रधान भटौली श्री धर्मेन्द्र कुमार शर्मा को समस्या निस्तारण हेतु पुनः मोबाइल द्वारा रिमाइड कराया गया तथा व्हाट्सएप के माध्यम से DPRO Kanpur Dehat द्वारा DM Kanpur Dehat को भेजी गई समस्या निस्तारित हो जाने की फर्जी सूचना की प्रति भेजी गई। समस्या आज तक पेंडिंग है।

Updated on 14/03/2022

भ्रष्टाचार की सीमा 

आज तक न नाली की सफाई हुई और न ही उसकी मरम्मत की गई। नाली मरम्मत के लिए DPRO से मोबाइल से संपर्क किया, प्रधान एवं ग्राम सचिव से भी सम्पर्क किया। न भी नहीं और काम भी नहीं। प्रधान ने आश्वासन दिया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में नाली मरम्मत हो जाएगी लेकिन आज तक नहीं।


Updated on 13/12/2021


DPRO द्वारा DM Kanpur Dehat
को भेजा गया पत्र















Updated on 08/07/21

#भ्रष्टाचार
जो आदतन भ्रष्ट है उससे काम की उम्मीद करना ही व्यर्थ है।एक समस्या जो सालों से चल रही है उसे अधिकारी फर्जी तौर पर निस्तारण कर देते है। जन सुनवाई पोर्टल एक दिखावटी स्थान है।
01/06/21 को इसी समस्या को शिकायत संख्या 40016321005905 की गई लेकिन जिला पंचायतराज अधिकारी कानपुर देहात ने समस्या निस्तारण की फर्जी  रिपोर्ट जिला अधिकारी कानपुर देहात को भेज दी।

जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 40016320015257 का फर्जी निस्तारण

किया गया। जांच अधिकारी ने कार्यालय में ही बैठकर जांच आख्या भेज दी। पोर्टल पर फीडबैक लिखा गया एवं ईमेल द्वारा जिलाधिकारी कानपुर देहात ,मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश ,संपादक दैनिक जागरण कानपुर एवं स्थानीय रिपोर्टर को भी सूचना दी गई। 


आज दिनांक ११/१२/२० को  मुख्यमंत्री को e-mail से प्रार्थना पत्र भेजा गया। 
समस्या के फर्जी निस्तारण से सम्बंधित एक प्रार्थना पत्र e-mail द्वारा मुख्य विकास अधिकारी कानपुर देहात को भेजा गया, 
आज दिनांक 15/11/20 पुनः समस्या को जनसुनवाई पोर्टल पर सन्दर्भ  संख्या 40016320013828 पर  पंजीकृत किया गया।

 आज दिनांक 11/11/20 को समस्या के फर्जी निर्धारण  की शिकायत ईमेल द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से की गई। 

10/09/20
आज गुलामरजा ने नाली पूर्ण रूपेण बंद कर दी. उप जिलाधिकारी अकबरपुर से फ़ोन से संपर्क करने प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी। बाद में ईमेल के द्वारा जिलाधिकारी कानपुर देहात को प्रार्थना पत्र भेजा गया  तथा मुख्य मंत्री उत्तरप्रदेश को भी फॉरवर्ड  किया गया। तथा 40016320006612 का फीडबैक लिखने पर भी फर्जी निस्तारण किया गया। सम्बंधित अधिकारी जनता को फर्जी काम करने की  प्रेरणा देते हैं। फर्जी काम में धन का बंदरबांट होना भी निश्चित है। इस फर्जी काम में शासन क्यों मौन है यह  चिंता का विषय है। 


Updated on 09/09/20

आज दिनांक 09 /09 /20  को घर निकलने वाली  पक्की नाली भटौली -सरायं रोड तक मेरे द्वारा साफ़ कराई गयी एवं ऊपर से ईंटो द्वारा बंद भी कर दिया गया ताकि गन्दगी और मच्छरों से से मुक्ति मिले। लेकिन नाली का पानी गुलामरजा के सामने अवरुद्ध है। 



जनसुनवाई समाधान पोर्टल पर दिनांक 13 /06 /20  को की गई शिकायत संख्या 40016320006612 आज तक  पेंडिंग है यद्यपि पोर्टल पर शिकायत का फर्जी निस्तारण कर दिया गया। 

11/08/20 को अद्यतन किया गया
समस्या मुख्य विकास अधिकारी द्वारा खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर को हल करने के लिए सन्दर्भित की गई लेकिन समस्या हल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
समस्या भ्रष्टाचार का शिकार हो गई। समस्या पोर्टल पर बार बार हल हो जाती  है लेकिन मौके पर हल नहीं।

09/08/2020 को अपडेट किया गया
जनसुनवाई पोर्टल या फिर ईमेल से भेजे गए प्रार्थना पत्रों पर कोई कार्यवाही नहीं होती है। 
जनसुवाई पोर्टल पर चाहे फीडबैक रिकॉर्ड या फिर रिमाइंडर के जरिए केवल पोर्टल पर एक्शन दिखाई देता है मौके पर कोई कार्य ही नहीं होता है। जाँच अधिकारी बार बार फर्जी निस्तारण की रिपोर्ट लागू करने में मदद कर रहे हैं ..आज तक शिकायत नंबर 400 16319014371, 40016320002227, 40016320006612 का केवल फर्जी निस्तारण हुआ। 
बुजुर्गों की समस्या के प्रति जिला स्तर के अधिकारी उदासीन। 

23/07/2020 को
दस्तावेजी अधिकारी प्रार्थना पत्र नहीं सुनते। एक ही समस्या को तीन बार जनसुनवाई समाधान पोर्टल पर और 1 बार मुख्य मंत्री हेल्पलाइन पर हर बार फर्जी निस्तारण।
खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर, कानपुर देहात ने बार-बार फर्जी समस्या निस्तारण की रिपोर्ट प्रेषक से गत वर्ष भटौली में डेंगू फैला और इस वर्ष भी डेंगू फैलने की शत प्रतिशत सम्भावना है।

इसी तरह केंद्र सरकार और राज्य सरकार के वरिष्ठ नागरिकों पर विशेष कृपा करये रखने के लिए उपहार संकल्प है। लेकिन हम उस जंग लगी मशीनों के बारे में क्या कहूँ जो अपनी कार्य शैली को बदलने के लिए तैयार ही नहीं है।

 योजनाएं तो बहुत अच्छी हों, समस्याएँ भी बहुत नाजुक हों उन्हें हल करना तो नौकरशाही के ऊपर निर्भर करता है। लेकिन नौकरशाही की कार्यशैली में डिजिटल इंडिया के तरह-तरह के बदलाव लाना ही बहुत गलत काम है।
हम 77 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हैं। चलने फिरने में कठिनाई है अतः डिजिटल मीडिया से अपनी समस्या हल करने का सहारा लेता हूँ। डिजिटल मीडिया ने वरिष्ठ नागरिकों की बहुत सी समस्याएं आसान हो गई हैं।

अब आते हैं जनता की समस्याओं को हल करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने जनसुनवाई समाधान पोर्टल को विकसित किया जिसका माध्यम से त्वरित, निर्धारित समयावधि में समस्या का समाधान हो लेकिन नौकरशाही ने इस पोर्टल पर भी अधूरा या फर्जी निस्तारण का रास्ता लिया है। आगे हम कुछ फर्जी निस्तारण के उदहारण प्रस्तुत कर रहे हैं:

जन परीक्षण समाधान पोर्टल पर मेरे द्वारा पंजीकृत शिकायत संख्या - 400 16319014371 दिनांक 18/10/19 का फर्जी निस्तारण दिखा कर खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर ने दिनांक 01/11/19 को जिलाधिकारी कानपुर देहात को रिपोर्ट भेज दी। दिनांक 21/02/2020 को मेरे द्वारा जिलाधिकारी कानपुर देहात (dmkan@nic.in) से अधूरे निस्तारण की शिकायत भी की गई और शिकायत को cmup@nic.in को भी भेजी गयी। प्रतिक्रिया देने पर भी कोई अर्थ नहीं निकला। खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर ने दिनांक 01 / 01.20 को पुनः फर्जी निस्तारण की रिपोर्ट जिला अधिकारी कानपुर देहात को भेज दी। यह डिजिटल इंडिया को धूल धूसरित करने का यह एक उदहारण है।
जनसुनवाई पोर्टल पर पंजीकृत संख्या -40016319014371 


   
प्रार्थी  के घर से निकलने वाली नाली  का मुख जो भटौली -जगदीशपुर रोड  (ब्लॉक -अकबरपुर )  पर खुलता है
पुनः जनसुनवाई समाधान पोर्टल उत्तर प्रदेश पर दिनांक 21/02/20 को इसी समस्या को मेरे द्वारा शिकायत संख्या 40016320002227 पर पंजीकृत किया गया है। बिनन्दक 29/02/20 को खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर ने समस्या निस्तारण की पुनः फर्जी रिपोर्ट जिलाधिकारी कानपुर को भेज दी। लेकिन आज तक समस्या का निस्तारण ही नहीं किया गया।
जनसुवाई समाधान पोर्टल पर पंजीकृत शिकायत संख्या -40016320002227 

  एक ही समस्या दो दो बार फर्जी निस्तारण की रिपोर्ट, खंद विकास अधिकारी अकबरपुर ने जिलाधिकारी कानपुर देहात को भेजी। 10 अप्रैल, 2020 को मेरे द्वारा जिलाधिकारी कानपुर देहात (dmkan@nic.in) से फर्जी निस्तारण की शिकायत की गई और cmup@nic.in द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को भी सूचना दी गयी। यद्यपि खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर ने 21/02/20 को समस्या का मौका बदलनेयना भी किया था और आश्वासन भी दिया कि गुलामजा फ्रंट मानक के अनुसार पैदल का निर्माण करा दिया जाएगा।


 नाली जिसे गहरा करना है नीचे  गई है :
जिसे मानक के अनुसार गहरा करने की प्रार्थना 


नाली  का निरीक्षण करते हुए खंड विकास अधिकारी अकबरपुर, कानपुर देहात  
सम्बंधित अधिकारी सही कार्य करने के लिए ताल मटोल क्यों करते हैं यह जांच का विषय है। अवधि है कि गुलाम रजा के सामने भटौली - जगदीशपुर रोड पर बनीवेल मानक के अनुसार गहरे की जाय क्योंकि मेरे घर का पानी गुलामरजा के सामने रोड के समानार बने दल से पानी निकलना बंद हो गया है।

जनसुनवाई समाधान पोर्टल उत्तर प्रदेश पर 2 बार समस्या पंजीकृत की गई पहली बार की शिकायत में आंशिक निस्तारण कर पूर्ण निस्तारण की रिपोर्ट खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर ने जिलाधिकारी कानपुर देहात को भीies और दूसरी बार की शिकायत में पूर्ण रूपन फर्जी निस्तारण की रिपोर्ट जिलाधिकारी कनूर देहात को दी। भेज दिया। आज भी समस्या ज्यों की त्यों पेंडिंग है।

फीडबैक देने के बाद भी आज तक समस्या पेंडिंग है।
 मुख्यमंत्री हेल्प लाइन:
दिनांक 27/03/2020 को प्रस्तुत समस्या को मुख्यमंत्री हेल्प लाइन पर पंजीकरण संख्या 92016300006441 पर पंजीकृत की गयी। जिसका फर्जी निस्तारण / आंशिक निस्तारण किया गया। फीडबैक देने पर और जिला पंचायत राज अधिकारी से मोबाइल संपर्क करने पर भी आक्रोश में आकर जिला पंचायत राज अधिकारी ने शुद्धता की समस्या को ही मजबूत कर दिया था। हम यहां अवगत कराने चाहते हैं कि सहायक विकास अधिकारी पंचायत अकबरपुर और जिला पंचायत राज अधिकारी कानपुर देहात का व्यवहार और बात चीत का ढंग पद के अनुकूल नहीं था .. हमें ऐसा लगा कि ग्राम पंचायत अधिकारी भटौली: जो फर्जी / आंशिक निस्तारण को पूर्ण निस्तारण की रिपोर्ट दी। अपने अधीनस्थ के आरक्षण में, सहायक विकास अधिकारी पंचायत अकबरपुर और जिला पंचायत राज अधिकारी कानपुर देहात हमारी बात सुनने को तैयार नहीं थे।
 



तीसरी बार इसी समस्या को फिर से जनसुनवाई समाधान पोर्टल पर दिनांक 13/06/2020 को शिकायत संख्या 40016320006612 पर शिकायत की गई। दिनांक 23/07/20 को समस्या निदान हेतु खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर से फोन पर संपर्क किया गया।इस बार भी खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर, कानपुर देहात ने दिनांक 09/07/2020 को पुनः समस्या के फर्जी निस्तारण की सूचना जिला अधिकारी कानपुर देहात को भेज दी।   20/05/2020 को समस्या निवारण के लिए खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर से व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क किया गया है। 26/05/20 को मोब। 7651812047 खंड विकास अधिकारी अकबरपुर से संपर्क किया गया।  दिनांक 29 मई 2020 को ग्राम पंचायत अधिकारी आशुतोष सिंह से मोबाइल नंबर 8707597387 पर संपर्क किया गया। ग्राम पंचायत अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष समाप्त, खेल समाप्त, पैसा हजम।







चिंतनीय / विचारणीय विंदु 
1- नौकरशाही  के फर्जी कार्यों से जनता में भी फर्जी कार्य के लिए प्रेरणा मिलती है।
2 -प्रथम बार की शिकायत / समस्या में निर्धारित विंदु से 7 मीटर को छोड़कर आगे नाली बनाई गयी और जहाँ बस्ती नहीं थी वहाँ नाली बनायीं गयी जिससे समस्या भी हल नहीं हुयी और पैसे का भी दुरूपयोग हुआ।
3 - दूसरी बार की गयी शिकायत / समस्या में खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर ने समस्या के पूर्ण निस्तारण की रिपोर्ट जिलाधिकारी कानपुर देहात को भेज दी गयी। जब वह समस्या आज तक लंबित है।
4 - समस्या हल में देरी होने से स्थिति और गंभीर होगी क्योंकि दूषित जल जब घर के बाहर नहीं जाएगा तब तक घर में रहना मुश्किल होगा।

नोट : इस ब्लॉग से छेड़ छाड़ किया गया है जो अब edit नहीं हो रहा है। बिन्दु (2) में स्पिन की जगह नाली पढ़ा जाय।

शनिवार, 9 नवंबर 2019

गंदगी से कानपुर देहात जिले में डेंगू का कहर

Updated on 26/11/2019 
                                       
 Blogger: अशर्फी लाल मिश्र  
अशर्फी लाल मिश्र








आज भारत में बढ़ रहा प्रदूषण एक राष्ट्रीय  समस्या का संकेत दे  रहा है। अब प्रदूषण महानगरों में ही नहीं बल्कि  प्रदूषण  का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों  पहुँच  गया है।  उसका मुख्य कारण स्थानीय निकाय और ग्राम्य विकास विभाग की उदासीनता होना।
  हम विडम्बना ही कहेंगे कि जब भारत गाँधी जी की 150 जयंती मना रहा हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  का जोर भी  हो स्वच्छता पर  विशेष हो और इतना ही नहीं स्वयं  नरेंद्र मोदी समुद्रतट पर पोलिथीन एवं बोतलें  उठाते हुए दिखाई दे रहे  हैं तब दिल्ली और कानपुर जैसे महानगर बढ़ते प्रदूषण का झंडा ऊंचा किये।


स्वच्छता बनाये रखने का उत्तरदायित्व ग्राम्य विकास विभाग और स्थानीय निकाय का है लेकिन ये संस्थाए भी स्वच्छता के प्रति गंभीर नहीं। संक्रामक बीमारियों को नियंत्रित करने वाले भी अधिकारी अपने उत्तरदायित्व के प्रति गंभीर नहीं हैं यदि ये  संस्थाए  गंभीर हों तो मच्छर जनित बीमारियां महामारी का रूप न लें।
संक्रामक बीमारियों से जब लोगो की  मृत्यु की सूचना प्रिंट मीडिया द्वारा मिलती है। तब सम्बंधित विभाग में  हलचल होती है। इसके पहले  अधिकारी सोते रहते हैं। प्रिंट मीडिया भी  कभी कभी सही समाचार देने में शिथिलता बरतती  है यदि प्रिंट मीडिया समय पर बजबजाती नालियों और जगह जगह कूड़े ढेरों की सूचना अपने समाचार पत्रों में दें तो भी कुछ समस्या हल हो  सकती है ।

कानपुर देहात और डेंगू 

महानगरों के बाद यदि देखा जाय तो गंदे जिलों में कानपुर   देहात जिले का नाम भी शुमार किया जा सकता है। जहाँ सफाई की लचर व्यवस्था से मच्छर जनित बीमारियों के कारण आम जनता  भयभीत है। सितम्बर 2019 से नवम्बर 2019 तक डेंगू और मलेरिया से हजारों लोग पीड़ित रहे और दर्जनों लोग इस संसार को छोड़कर चले गए। 
         

 डेंगू से सर्वाधिक  प्रभावित क्षेत्रों में भटौली , रूरा, अकबरपुर, झींझक   रहे।  वैसे डेंगू और  मलेरिया ने पूरे जिले में  पैर पसार  रहा है। कानपुर देहात जिले के मुख्यालय के नजदीक स्थित अकबरपुर,रूरा,और भटौली जैसे स्थानों में मच्छर जनित बीमारियों का होना जिले के  ग्राम्य विकास विभाग की पोल खुलती नजर आती है। सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग एवं जिले के  अधिकारी  तब सोते से जागते हैं जब प्रिन्ट मीडिया उन्हें डेंगू से होने वाली मौतों की सूचना देता है। [1] [2] 2[a] [3 ]
पार्श्व चित्र में डेंगू की जाँच के लिए खड़े हैं लेकिन जांच की सुविधा नहीं। [4]
गंदगी के कारण कानपुर देहात जिले में मच्छरों का साम्राज्य।  जिले में डेंगू ने महामारी का रूप ले लिया है। मेडिकल कॉलेज से अब तक 75 डेंगू से पीड़ित मरीजों की सूचना। [5]

21/11/2019
रानियाँ में डेंगू से  एक महिला तथा भटौली -रूरा  में एक बच्चे की जीवन लीला समाप्त [6]

   
22/11/2019
डेंगू से  मौत पर 25  लाख़ का मुआवजा. 
 डेंगू  की बीमारी से  सम्बंधित  एक याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने  डेंगू से मौत होने पर  25 लाख मुआवजा देने का आदेश।6[a]   सभी जिलाधिकारियों को डेंगू से बचाव और  इलाज की समुचित व्यवस्था का निर्देश [7]

24/11/2019
 कानपुर मेडिकल कॉलेज ने 3  और डेंगू के मरीजों की पुष्टि की [8]
25/11/2019
ग्राम जिगनिस डेरापुर में  डेंगू से एक किशोरी मौत (दैनिक जागरण -कानपुर )
26/11/2019
डेंगू के 5 और  मरीज मिले। आंकड़ा 85, मेडिकल कॉलेज कानपुर  के अनुसार [9]


सफाई और बचाव 
आज भी नालियां बजबजा रही है। एंटी लार्वा का छिड़काव  बहुत सीमित अर्थ में। एंटीलार्वा का छिड़काव केवल उन घरों तक  सीमित  जिनकी सूचना मेडिकल कॉलेज कानपुर  से सी एम ओ कानपुर देहात के पास आयी। प्रतिदिन सैकड़ों नए डेंगू के मरीज। डेंगू से बचाव के  लिए प्रिंट मीडिया में केवल प्रचार। सफाई कर्मचारी गायब।



मृदा प्रदूषण 

आज अधिकांश वस्तुएं  चाहे वे ठोस हों या फिर तरल , सभी की सभी  पॉलिथीन / प्लास्टिक के कंटेनर या पाउच   के  रूप में   बाजार में उपलब्ध हैं।
वनस्पति घी ,  दूध ,तेल , पानी आदि सभी कुछ पाउच या बोतलों में उपलब्ध हैं इनके उपभोग के बाद त्याज्य पाउच ,बोतल आदि या तो नाली में या  कूड़े के ढेर में या फिर खेतों की ओर जा कर कृषि भूमि को उनुपजाउ करने में सक्रिय भूमिका अदा  कर रहे  हैं।
पान का मशाला हो या फिर नमकीन , तम्बाकू की  पुड़िया हो या फिर हो फिर चॉकलेट।   हमारा कहने का अर्थ यह  है कि  बाजार में  95 % वस्तुएं प्लास्टिक /पॉलीथिन की पैकिंग में उपलब्ध हैं।  वस्तुओं के स्तेमाल के बाद  पैकिंग पदार्थ दिन पर दिन सीधे सीधे मृदा प्रदूषण को बढ़ा रहे है।  इससे कृषि उपज प्रभावित हो रही है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सरकार हमारे कथन के तथ्य से परिचित न हो।

वायु प्रदूषण 

वायु प्रदूषण का  एक कारण पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से  सरकार कुछ चिंतित जरूर नजर आ  रही है वह भी जब उच्चतम न्यायालय की निगाह टेढ़ी हुयी। इसके अलावा और भी कारण हैं जिनके कारण वायु प्रदूषण बढ़ रहा है जो निम्न हैं ;
1 - रोड पर धुल और मिटटी
2 - उखड़ते हुए रोड
3 - बिना फिटनेस  के डीजल वाहन (10 वर्ष के बाद ) ,पेट्रोल वाहन (15 वर्ष के बाद ) उगलते जहर।
4 - आज भी होटलों में कोयला / लकड़ी की भट्ठियों का संचालित  होना
5 - लगभग सभी खोये की भट्ठियां कोयला से संचालित
6  - पॉलीथिन  से युक्त कचरा स्थानीय निकायों द्वारा जलाया जाना
7  - आतिशवाजी का प्रयोग

जल प्रदूषण 

प्रदूषित जल के प्रयोग से लोग संक्रामक बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। जल प्रदूषण के निम्न कारण हैं:
1 - गन्दा पानी जहाँ रुकता हो जैसे - सीवर टैंक के पास हैंड पाइप / सब्मर्सिबल पंप
2 - नदियों के  जल को उसमें गिरने वाले  गंदे नाले  प्रदूषित करते हैं।
3 - कारखानों से निकलने वाला दूषित  जल भूमि जल को दूषित कर  रहा है।
4 - दूषित जल न ही पीने योग्य और न ही सिचाई योग्य।

अभिमत 
1 -पॉलिथीन  /  प्लास्टिक निस्तारण के प्लांट लगाए जाँय।
1(a)- खेतों में  पराली , कूड़े के ढेर को जलाने से रोका जाना चाहिए।
2 - अब ग्राम्य विकास विभाग  द्वारा  जल निकासी / सफाई कार्य प्राथमिकता के साथ कराये जाने चाहिए।
3 - ग्राम पंचायत अधिकारी को अनिवार्य रूप से ग्राम पंचायतों में जाने को कहा जाय। वर्तमान में ग्राम   पंचायत अधिकारी ब्लॉक स्तर पर अपना कार्यालय खोले हुए हैं।
4 - गन्दगी से होने वाली  बीमारी की स्थिति में सम्बंधित  अधिकारी को जवाबदेह ठहराया जाय।
5 - सभी सफाई कर्मचारियों अपने कार्य स्थल पर अनिवार्य रूप से बाध्य किया जाय। डुप्लीकेट सफाई कर्मचारियों पर नियंत्रण हो।
6 - कोयले/ लकड़ी की भट्ठियों को प्रतिबंधित किया जाय।
7 - धुँवा उगलने वाले वाहनों को रोड पर चलने से  रोका जाना चाहिए।
8 - प्रदूषित जल प्रवाह करने वाले  कारखानों  को जल शोधन के लिए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के लिए बाध्य किया जाय।


बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

स्वच्छता दीर्घ जीवन की कुंजी है

*अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर*           Updated on 12/10/19
          स्वच्छता एक ऐसा बिंदु है जो सर्वजन हिताय सर्वजन  सुखाय  है।   भारतीय लोकतंत्र में यह मुद्दा आजादी के लगभग सातवें  दशक के   अंत में   सामने तब  आया जब पॉलिथीन ,थर्माकोल आदि से नालियां जाम होने लगी ,  कार्यालय की दीवालें पीक से रंगीन होने लगी , अधिकारीयों की मेज के नीचे पीकदान शोभा देने लगे , गंगा जैसी पवित्र नदियाँ एक गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो गईं ,तब कहीं जाकर सरकार का ध्यान इस ओर गया।

        भारत में प्राचीन काल से ही स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता था. ऋषि  और मुनि और उनके आश्रम ,नदियाँ और जलाशय  स्वच्छता के केंद्र विन्दु थे।  सभी ऋषियों , मुनियों के आश्रम  नदियों के तट या जलाशय के निकट ही होते थे।

         स्वच्छता न कोई राजनीतिक मुद्दा है और न ही वर्ग विशेष को तुष्ट करने वाला । यह मुद्दा सर्वजन हिताय है। इस मुद्दे का सम्बन्ध न किसी जाति  से है और न ही किसी धर्म से।  यह मुदा अमीर और गरीब सभी के लिए बराबर हितकारी है। स्वच्छता का सम्बन्ध किसी राजनीतिक दल का राजनीतिक एजेंडा से  भी नहीं है।  अतः सभी सभी जाति /धर्म , अलप संख्यक /बहु संख्यक , अमीर/गरीब , सत्ताधारी दल /विपक्ष आदि सभी को स्वच्छता अभियान में सक्रिय भाग लेना चाहिए।
व्यक्तिगत स्वच्छता 
        व्यक्तिगत स्वच्छता में ऋषियों ,मुनियों को आदर्श कहा जा सकता है वह  सदैव शौंच के बाद स्नान और लघुशंका (पेशाब ) के बाद मूत्रनली को जल से धोते थे ऐसा करने से यूरिन इन्फेक्शन से यह ऋषि- मुनि सदैव बचे रहते थे। ज्ञातव्य हो की यदि मल के बैक्टीरिया मूत्रमार्ग तक पहुँच जॉय तो यूरिन इन्फेक्शन ( Urine infection) हो जाता है।
 कालांतर  में वैष्णव (दंडी स्वामी ) आदि साधुओं ने भी व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दिया।
        वर्तमान में  व्यक्तिगत स्वच्छता में कमी आयी है।लोगों में  पान मशाला , मैनपुरी तम्बाकू ,गुटखा का प्रचलन गुणोत्तर गति से बढ़ रहा है। इससे न केवल ऐसे लोग कैंसर को आमंत्रित कर रहे है बल्कि जहां भी खड़े बैठे होते है वहीँ पर मुंह की पिचकारी से गन्दा करते है। यह केवल सामान्य जन  की बात नहीं है बल्कि विशिष्ट जन भी पीछे नहीं है।
          आइये अब हम एक उदहारण देते हैं हम अपने गंतव्य पर जाने के लिए बस का इन्तजार कर रहे थे अचानक एक मार्शल गाड़ी रुकी उसके सामने के सीसे में मजिस्ट्रेट लिखा था। ड्राइवर सीट के बगल जो व्यक्ति बैठा था हम ने उसे मजिस्ट्रेट ही समझा। वह व्यक्ति गाडी से उतरा और पहले  उसने  जमीन पर पिचकारी से डिजाइन बना दी और तब एक दूकान की ओर बढ़ा। इसी बीच हमारी बस आ गई और हम बस से अपनी यात्रा पर चल दिए।
परिसर की स्वच्छता 
           आवास , कार्यालय , गेस्ट हाउस , विद्यालय /कॉलेज / शिक्षण संस्थान या फिर अन्य जैसे रेलवे स्टेशन /हवाईअड्डा ,बंदरगाह आदि  हो; इन सभी जगहों की स्वच्छता दायित्व सम्बंधित प्रमुखों का है।
परिवेश की स्वच्छता 
              परिवेश को स्वच्छ रखना ही सबसे कठिन बिंदु है इसमें नालियाँ , रोड , तालाब ,नदियां आदि आती है। सर्वाधिक गंदगी इन्हीं स्थानों पर मिलती है। परिवेश को स्वच्छ रखने के लिए कठोर निरीक्षण की आवश्यकता है। अभी तक देखने में आया है कि जो भी व्यक्ति / या संस्था परिवेश स्वच्छ रखने के लिए जिम्मेदार है वे अपने उत्तरदायित्व निर्वहन  में असफल हैं।
आम जनता  
             आम जनता अभी अपने परिसर की सफाई तो करना चाहते हैं लेकिन परिवेश की सफाई के प्रति उदासीन हैं।  अभी सभी दूकानदार डस्टबिन रखते भी नहीं और जो डस्टबिन  रखे हुए भी है उनमें ग्राहक अभी प्रयुक्त मिटटी के कुल्हड़ , दोने,कागज आदि डालने के  अभ्यस्त भी  नहीं है। नदियों में आज भी शव प्रवाह , ज्वलित शव के अवशेष , पूजन सामग्री आदि भी प्रवाहित करने का प्रचलन है, इसका विकल्प खोजा जाना चाहिए।
जनप्रतिनिधि  
           जनप्रतिनिधियों में स्वच्छता के प्रति  गंभीर रूचि नहीं दिखाई पड़ती। जनप्रतिनिधि स्वयं   एवं  इसके लिए जिम्मेदार संस्था  को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते रहना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता।  हाँ  इतना अवश्य है कि  कभी कभी कैमरे  में झाड़ू लिए फोटो खिचवाने की ललक अवश्य रहती है और प्रिंट मीडिया में झाड़ू पकड़े हुए फोटो भी छपती है।  लेकिन सफाई प्रदर्शन में विपक्ष के जन प्रतिनिधि या तो शामिल नहीं होते या फिर बहुत ही कम।
समाज सेवक/सामाजिक कार्यकर्ता  
             समाज सेवक में जन प्रतिनिधि भी शामिल हैं। जन प्रतिनिधियों के अलावा भारत में समाज सेवकों की  बहुत बड़ी फ़ौज है लेकिन स्वच्छता के प्रति कोई भी आग्रह नहीं ,कोई अभिरुचि नहीं। आज के समाज सेवक रिपोर्टर के कैमरे के सामने नई झाड़ू लेकर फोटो खिंचा सकते हैं।  अभी तक भारत रत्न के पुरस्कार अधिकतर सोशल एक्टिविस्ट को ही मिले हैं।
स्वच्छता और महात्मा गाँधी 
       गाँधी जी समाज   सेवक थे।  वे ब्रह्म मुहूर्त में विना प्रदर्शन किये चुप चाप मलिन बस्ती में झाड़ू लगाते थे।  समाज सेवा के क्षेत्र में महात्मा गांधी  अतुलनीय  है। 2 अक्टूबर 2019 से गाँधी जी की 150 वीं जयंती मनाई जा रही है।                                                           
                                            150 वीं गाँधी जयंती के अवसर पर रु 150 का सिक्का
स्वच्छता और नरेंद्र मोदी 
        महात्मा गाँधी  के बाद सार्वजानिक सफाई की ओर यदि किसी का   ध्यान गया तो वह नरेंद्र  मोदी हैं।   2 अक्टूबर 2014 को सफाई अभियान को गति देते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के वाल्मीकि  नगर में  झाड़ू लगाई और स्वयं कूड़ा फेंका।[1]  स्वतंत्र भारत के  इतिहास  में मोदी का यह सफाई अभियान स्वर्णाक्षरों लिखा जायेगा।
                                                                         
                                दिल्ली के वाल्मीकि नगर में झाड़ू  लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  
                                                                             
                                              पी एम   नरेंद्र मोदी तट पर कूड़ा उठाते हुए
12 अक्टूबर 2019 को प्रातः भ्रमण के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममल्लापुरम के समुद्र तट की साफ-सफाई  की।[2]                                         
     
लोकसेवक  
       सभी सरकारी  अधिकारी /कर्मचारी लोक सेवक की श्रेणी में आते है लेकिन लोक सेवकों में , लोक सेवा कम अधिकार  भावना अधिक।   यह अधिकारी /कर्मचारी अपने -अपने कार्यालय में गुटका ,पानमसाला या  धूम्र पान केवल निषेध ही करा दें तो बड़ी बात  है। स्वच्छता का उत्तरदायित्व संभाल रहे  अधिकारी जितना सजग होना चाहिए उतना सजग नहीं हैं।
          सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति होने बाद भी अभी गावों में सफाई संतोष जनक नहीं है। सफाई कर्मचारी अपने नियुक्ति स्थल पर कार्य करें इसके लिए कोई भी अभी तक  न ही उचित  निरीक्षण सुनिश्चित  है और न ही उपस्थिति सुनिश्चित होती है। जल भराव की स्थिति में  , गन्दगी से होने वाली बीमारी की स्थिति  में  कौन जिम्मेदार होगा?
      घर में शौचालय  निर्माण हो या नालियों की सफाई/निर्माण  की फर्जी रिपोर्ट प्रेषित की जाती है। इस  पर नियंत्रण लगना चाहिए।
 स्वच्छता से सम्बंधित जनसुनवाई  पोर्टल पर  की गयी शिकायतों की  फर्जी  निस्तारण  सूचना  जिलाधिकारियों को दी रही है।
अभिमत 
1 - व्यक्तिगत स्वछता के लिए शिक्षण संस्थाओं में छात्रों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
2 - सभी शिक्षण संस्थाओं / कार्यालयों के समीप, 10 घरों के मध्य  कूड़ा डालने  के लिए कूड़ादान (डस्टबिन)  की व्यवस्था की जनि चाहिए। यह डस्टबिन भी नियमित खली किये जाने चाहिए।
3 - नालियों की सफाई नियमित हो।  तलहटी में जमी सिल्ट भी समय - समय पर निकली जानी चाहिए।
4 - पॉलिथीन के कारण नालियों में जल प्रवाह रुकता अतः पॉलिथीन का निर्माण ,बिक्री एवं प्रयोग प्रतिबन्ध के बाद कठोर निरीक्षण की आवश्यकता है।
5 - वातावरण को गन्दा करने में पान मशाला , गुटखा और मैनपुरी तम्बाकू की बहुत बड़ी भूमिका है अतः पान मशाला , गुटखा एवं मैनपुरी तम्बाकू का निर्माण एवं विक्री प्रतिबंधित की जाय।
6 - मच्छर जनित बीमारियों को रोकने के लिए समय- समय पर फॉगिंग या डी डी टी का छिड़काव किया जाना चाहिये।
7 - प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में स्वच्छता विषय अनिवार्य होना चाहिए।

मंगलवार, 11 जून 2019

शूद्र शब्द का प्रयोग केवल संगठनात्मक ढांचा बनाने में


Asharfi Lal Mishra










शूद्र कोई जाति नहीं ,शूद्र कोई वर्ण नहीं। आज हम इस लेख में शूद्र शब्द पर विशद विवेचन करेंगे।

हमारी दृष्टि में शूद्र वह व्यक्ति है जो जन्म लेने  के बाद  अपने आप को किसी भी प्रकार की शिक्षा या कौशल कला की शिक्षा  से वंचित रखता है और ऐसा व्यक्ति जीवन यापन के लिए दूसरे व्यक्तियों  की सेवा में अपने को संलग्न  रखता है    
वैदिक शास्त्रों में भी कहा गया है :
" शोचनीयः शोच्यां स्थितिमापन्नो वा सेवायां साधुर अविद्यादिगुणसहितो मनुष्यो वा। "[1]
अर्थात शूद्र वह व्यक्ति है जो अपने अज्ञान के कारण किसी भी प्रकार की उन्नति को प्राप्त नहीं कर पाया और जिसके भरण पोषण की चिंता स्वामी के द्वारा की जाती है। 

   यह भी कहा गया कि प्रत्येक व्यक्ति जन्म से शूद्र है और जब तक व्यक्ति शिक्षा या कौशल कला  का ज्ञान  प्राप्त नहीं  करता तब तक शूद्र ही रहेगा  .इसका अर्थ यह हुआ कि  प्राचीन काल से ही शिक्षा का विशेष महत्व रहा है  और शायद इसी लिए न पढ़ने वाले के लिए शूद्र शब्द का स्तेमाल किया गया होगा। 

वर्तमान समय में देश में अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा शायद इसीलिए लागू  की गयी है  कि सभी लोग शिक्षित हों और कौशल कला में निपुण हों ताकि देश में कोई भी व्यक्ति शूद्र न कहलाये। सरकार का इस ओर भागीरथ  प्रयास भी है  आशा है सरकार अपने इस प्रयास में सफल होगी और देश में  न कोई अशिक्षित होगा और न ही किसी व्यक्ति को शूद्र कहा जायेगा। 

शूद्र शब्द की वास्तविकता को जानते हुए भी कुछ लोग जातीय संगठनों में ,  एन जी ओ में , जातीय सम्मेलनों में  धार्मिक ठेकेदार या फिर कभी- कभी राजनेता भी शूद्र शब्द की गलत व्याख्या कर अपना स्वार्थ सीधा करने में नहीं चूकते। 

हमें तब आश्चर्य हुआ जब  एक संगठन से जुड़े व्यक्ति ने यह कहा कि " भीमराव रामजी आम्बेडकर , रविदास और कृष्ण द्वैपायन शूद्र थे " मैंने तत्काल प्रतिवाद किया और कहा  कि " आम्बेडकर विधि वेत्ता  , रविदास ज्ञानी और कला कुशल तथा कृष्ण द्वैपायन (व्यास) कवि एवं उद्भट  विद्वान थे " 

ऊपर हमने जिस व्यक्ति की चर्चा की वह  एक संगठन में उपदेशक हैं और अनुसूचित जाति  से सम्बन्ध रखते हैं। हमने बात बढ़ाते हुए उनसे कहा कि एक समय था जब अपढ़ लोगों को जिन्हें शूद्र की संज्ञा दी जाती थी उन्हें पढ़े लिखे लोगों के बीच बैठने का अवसर नहीं मिलता था। आज इस समय  आप कुर्सी पर बैठे है और मैं   खड़ा हूँ कृपया बताइये हम में और आप में कौन शूद्र है। बस इतना कहते ही वह व्यक्ति हाथ जोड़ते हुए और मुस्कराते हुए  वहां से चला गया । 

अभिमत 
 वर्तमान में देश कोई भी  व्यक्ति शूद्र नहीं। कुछ एन जी ओ और कुछ राजनेता  इस शब्द का बेजा स्तेमाल करते हैं। ऐसे एन जी ओ प्रमुखों , उपदेशकों और राजनेताओं को सद्बुद्धि प्राप्त करने के लिए मैं  ईश्वर से प्रार्थना  करता हूँ अथवा कानून बनाकर शूद्र शब्द जो घृणामूलक है उसे प्रतिबंधित करने के लिए सरकार निवेदन  करूंगा । 




रविवार, 2 जून 2019

प्राथमिक शिक्षा को सुधारने के लिए अब तक किये गए सारे प्रयास असफल

By : Asharfi Lal Mishra

Asharfi Lal Mishra










प्राथमिक शिक्षा को सुधारने के लिए ज्यों-ज्यों प्रयास किये गए त्यों त्यों प्राथमिक शिक्षा की दुर्गति होती  चली गयी।

आजादी के बाद और करीब करीब  1970 के अंत तक प्राथमिक शिक्षा के प्रति जनता में एक अच्छा सन्देश जाता था। 

जब शिक्षा जिला परिषद् के अधीन थी तब प्राथमिक  शिक्षा का स्तर  आज की तुलना में बहुत ही बेहतर था। बेसिक शिक्षा परिषद्  के गठन के बाद जहाँ शिक्षकों की सेवा दशाओं में निरन्तर सुधार हुआ वहीँ दूसरी ओर  शिक्षा की गुणवत्ता में निरन्तर ह्रास होता चला गया और आज स्थिति यह है कि अभिभावकों और बच्चों ने  प्राथमिक से अपना मुख मोड़ लिया है। 

जब से शिक्षा समवर्ती सूची में सम्मिलित हो गई तब से राज्य का आर्थिक भार तो कम हो गया लेकिन राज्य ने कभी भी प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता की ओर ध्यान ही नहीं दिया। राज्य सरकार ने बैक डोर से अयोग्य शिक्षकों की भर्ती के निमित्त शिक्षा मित्रों की भर्ती कर ली। यह शिक्षा मित्र स्थानीय ग्राम सभा द्वारा नियुक्त किये गए। इन शिक्षा मित्रों में बहुत से शिक्षा मित्र दमंग / प्रभावशाली परिवारों से सम्बंधित थे ऐसे लोग सप्ताह में या महीने में जाकर केवल हस्ताक्षर कर मानदेय प्राप्त करने लगे। दमंग / प्रभावशाली / महिला शिक्षा मित्रों को विद्यालय में समय वद्ध करने में प्रधानाध्यापक अपने को असमर्थ पाने लगे। बस यही से प्राथमिक शिक्षा की दुर्गति प्रारम्भ हो गयी। 

जब स्थानीय  शिक्षा मित्र  प्रधानाध्यापकों पर भारी पड़ने लगे तो प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने भी  विद्यालय आने की  शिक्षा मित्रों की शैली  अपना ली और विद्यालय आने के  दिन निर्धारित कर लिए। 

कुछ शिक्षकों ने प्रधानाध्यापकों से, कुछ ने खंड शिक्षा अधिकारीयों से सांठ गांठ कर उपस्थित होने के दिन निर्धारित कर लिए। 

समय की गति  और विभागीय अधिकारीयों की सांठ - गाँठ से शिक्षकों ने कार्य स्थल से सैकड़ों किलो मीटर दूर  आवास बना लिए। 

प्राथमिक शिक्षा में मनचाहा ब्लॉक और स्कूल पाने के लिए रेट भी निर्धारित हैं। 

वर्तमान में जो   प्रधानध्यापक स्वयं  अनियमित हैं  और अनियमित प्रधानाध्यापक अपने सहायकों पर कैसे  नियंत्रण पा सकते हैं? यह एक गंभीर प्रश्न है ? 

कई स्कूलों में जब अनियमित शिक्षक छात्रों की पिटाई करते हैं तब उन्हें अभिभावकों के विरोध का सामना करना भी  पड़ता है।  

 शिक्षक संघ भी सचेत है उसने शैक्षिक गुणवत्ता के गिरते स्तर के लिए  संसाधन की कमी को जिम्मेदार ठहराया।

विद्यालयों के शिक्षण कक्षों,शौंचालय तथा परिसर की सफाई  कैसे हो यह भी सरकार को  हर कीमत पर सुनिश्चित करना है। 

वर्तमान में विद्यालयों की भौतिक स्थिति अच्छी है संसाधन भी पर्याप्त है फिर क्या कारण है कि  छात्रों और अभिभावकों का   प्राथमिक विद्यालयों से मोह भांग हो गया है और निरंतर छात्र संख्या गिर रही है। 

इधर कुछ वर्षों से शैक्षिक सुधार और निरीक्षण  के निमित्त प्रत्येक ब्लॉक में 10  एन पी आर सी ,  4 ए  बी आर सी ,1  बी आर सी और एक खंड शिक्षा अधिकारी   नियक्त है लेकिन यह केवल अपनी - अपनी  सर्विस कर रहे है लेकिन बच्चों की किसी को भी परवाह नहीं। 

एक अभिभावक ने बताया कि  प्राथमिक विद्यालय में बच्चे भेजना सुरक्षित नहीं है। बच्चे आपस में लड़ सकते है  शिक्षक समय पर आते नहीं हैं। 

शिक्षक  का पद अन्य कर्मचारियों से भिन्न है  जहाँ अन्य कर्मचारियों के पद आर्थिक भ्रष्टाचार से जुड़े होते हैं।  उन्हें अन्य जिलों में स्थानांतरित भेज कर  भ्रष्टाचार में कुछ कमी की कल्पना की जा सकती है। वहीँ शिक्षक का पद  समय की नियमितता से जुड़ा हुआ है। 

वर्तमान में निरीक्षण प्रणाली इतनी लचर है जिसका कोई अर्थ ही नहीं। 
हमारा कहने का यह आशय नहीं है कि  सभी शिक्षक अनियमित हैं कुछ ऐसे भी शिक्षक है  जो समय पालन के साथ साथ  शिक्षण कार्य में रूचि भी रखते हैं लेकिन ऐसे शिक्षकों की संख्या कम है। 

प्राथमिक शिक्षा से लोगों का  मोह भंग  का एक कारण और भी है और वह है गली -गली में गैर मान्यता प्राप्त  विद्यालयों का खुलना। 

सुझाव 

1 - विद्यालयों का सघन निरीक्षण 
2 - शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए स्थानांतरण करना कोई विकल्प नहीं है। 
3 - शिक्षकों और छात्रों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित हो। 
4  - जहां तक संभव हो महिला शिक्षकों को रोड के किनारे ही विद्यालय आवंटित हों  .जिससे  समय पर आने में किसी प्रकार का बहाना न हो।
5 - विद्यालयों में शिक्षण कक्षों , शौंचालय तथा परिसर की सफाई समय पर अवश्य सुनिश्चित हो। 


अनर्गल बयानबाजी से कांग्रेस की प्रतिष्ठा गिरी

 ब्लॉगर : अशर्फी लाल मिश्र अशर्फी लाल मिश्र कहावत है कि हर ऊँचाई के बाद ढलान  होती है । ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने में कांग्रेस ने जनता ...